About Prosecution Department


मध्य प्रदेश अभियोजन विभाग का संक्षिप्त परिचय

  • आपराधिक न्याय प्रशासन के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं- न्यायालय, पुलिस एवं अभियोजन. जिनमें अभियोजन का कार्य न्यायालय के समक्ष पुलिस द्वारा अनुसन्धान उपरांत एकत्रित की गई समुचित साक्ष्य प्रस्तुत कर पीड़ित को न्यायालय के माध्यम से न्याय प्रदान कराना एवं अपराधी को अपराधिक कृत्य के लिए दण्डित कराने का है. इस प्रकार अभियोजन विभाग सम्पूर्ण आपराधिक न्याय प्रशासन की रीढ़ की तरह कार्य करता है एवं कानून व्यवस्था के सुचारू संचालन में प्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. लोक अभियोजन संचालनालय म०प्र० का मुख्यालय भोपाल में स्थित है. वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संचालनालय में एक संचालक, दो संयुक्त संचालक, दो उप संचालक, पांच सहायक संचालक एवं लिपिक वर्गीय स्टाफ कार्यरत है. संचालनालय के अधीन सभी जिला मुख्यालयों पर जिला अभियोजन कार्यालय स्थापित हैं, जिनमें उप संचालक अभियोजन, जिला लोक अभियोजन अधिकारी, अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी एवं सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी कार्यरत हैं. इसके अतिरिक्त पुलिस मुख्यालय, सी०आई०डी०, ई०ओ०डब्लू०, लोकायुक्त, महिला सेल, एस०सी०एस०टी० शाखा, पुलिस प्रशिक्षण संसथान, राज्य लोक सेवा आयोग, विशेष शाखा पुलिस, रेल्वे पुलिस एवं राज्य साइबर सेल में प्रतिनियुक्ति पर अभियोजन अधिकारी कार्यरत हैं.

  • दण्ड प्रक्रिया संहिता १९७३ की धारा २४ एवं २५ के प्रावधानों को मूर्तरूप देने के उद्देश्य से पुलिस विभाग से पृथक स्वतंत्र अभियोजन व्यवस्था का निर्माण करने हेतु वर्ष १९८७ में म०प्र० शासन ने पुलिस विभाग से अभियोजन संवर्ग को पृथक करके लोक अभियोजन संचालनालय का गठन किया है। वर्तमान में लोक अभियोजन संचालनालय दण्ड प्रक्रिया सहिंता १९७३ की धारा २५-ए के तहत अधिशासित है. दण्ड प्रक्रिया सहिंता ( मध्यप्रदेश संशोधन ) अधिनियम, २०१३ के द्वारा धारा- २५-ए जोड़ी गई है,
    जिसके अनुसार- धारा-२५ ए-

  • (1) राज्य सरकार, एक संचालक अभियोजन तथा उतनी संख्या में, जितनी कि वह ठीक समझे, अतिरिक्त संचालक अभियोजन, संयुक्त संचालक अभियोजन, उप संचालक अभियोजन तथा सहायक संचालक अभियोजन से मिलकर बनने वाला एक अभियोजन संचालनालय स्थापित कर सकेगी.

  • (2) संचालक अभियोजन, अतिरिक्त संचालक अभियोजन, संयुक्त संचालक अभियोजन, उप संचालक अभियोजन तथा सहायक संचालक अभियोजन के पद तथा अन्य पद समय-समय पर यथा संशोधित, मध्यप्रदेश लोक अभियोजन (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम १९९१ के अनुसार भरे जायेंगे.

  • (3) अभियोजन संचालनालय का प्रमुख संचालक अभियोजन होगा जो राज्य में गृह विभाग के प्रमुख के प्रशासकीय नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा.

  • (4) प्रत्येक अतिरिक्त संचालक अभियोजन, संयुक्त संचालक अभियोजन, उप संचालक अभियोजन तथा सहायक संचालक अभियोजन तथा उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अन्य पद संचालक अभियोजन के अधीनस्थ होंगे.

  • (5) मध्यप्रदेश लोक अभियोजन (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम १९९१ के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजन और अतिरिक्त लोक अभियोजक, संचालक अभियोजन के अधीनस्थ होंगे तथा उच्च नयायालय में मामलों का संचालन करने के इए धारा-२४ की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक तथा अतिरिक्त लोक अभियोजक तथा धारा-२४ की उपधारा (८) के अधीन प्रत्येक विशेष लोक अभियोजक महाधिवक्ता के अधीनस्थ होंगे.

  • (6) जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए धारा २४ की उपधारा (3) के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक तथा अतिरिक्त लोक अभियोजक तथा धारा २४ की उपधारा (८) के अधीन नियुक्त प्रत्येक विशेष लोक अभियोजक, जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होंगे.

  • (7) संचालक अभियोजन की शक्तियां और कृत्य ऐसे होंगे जैसे कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे.


दायित्व

अभियोजन संचालनालय का मुख्य दायित्व, म०प्र० में सभी मजिस्ट्रेट के न्यायालयों व सत्र न्यायालयों में विचाराधीन आपराधिक प्रकरणों का “राज्य” की ओर से प्रभावी संचालन करना , “राज्य” अर्थात “लोक” का पक्ष प्रस्तुत करना तथा अपराधियों को दण्डित करवाने का है. संचालनालय के गठन के पूर्व नियमित संवर्ग के अभियोजक गण केवल “पुलिस विभाग” द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रकरणों की पैरवी का कार्य मजिस्ट्रेट न्यायालयों में करते थे. संचालनालय के गठन के पश्चात पुलिस विभाग सहित, वन विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, नापतौल विभाग, आबकारी विभाग के प्रकरणों में पैरवी का दायित्व भी अभियोजन अधिकारियों को दिया गया है.



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